प्र.1. मेंडल की सफलता के कारणों को लिखिए।
Ans. ग्रेगर जॉन मेंडल ने मटर के पौधों में सात वर्षों (1856-1863) तक संकरणों के प्रयोग कर आनुवंशिकता के नियमों का प्रतिपादन किया। मटर के प्रयोग हेतु मेंडल ने मटर के शुद्ध जातियों का उपयोग किया। इसके लिए मेंडल ने शुद्ध जातियों के चयन हेतु उपयुक्त मापदंडों का प्रयोग किया। इसके बाद मेंडल ने दो भिन्न जातियों के संकरण से प्राप्त संतति का सूक्ष्म अध्ययन किया। इसके लिए मेंडल ने मटर के सात विभिन्न युग्मन लक्षणों का चयन किया। इनके मध्य वहन संबंधी कोई प्रभाव नहीं पाया गया। इसके पश्चात् मेंडल ने इन लक्षणों के स्वतंत्रता से पृथक्करण और स्वतंत्र संयोजन के नियमों को स्थापित किया।
मेंडल ने अपने प्रयोगों में गणनात्मक विश्लेषण का भी प्रयोग किया जो सर्वथा प्रयोगशील था; जैसे लाल और सफेद फूलों के मध्य संकरण से प्राप्त संतति में सूत्रणात्मक नियमों का आंकिक रूप से वर्णन किया। इस प्रकार मेंडल ने संभाव्यता के नियमों के अनुसार आनुवंशिक घटनाओं को प्रतिपादित किया। मेंडल ने ऐसे लक्षणों का चयन किया जो स्पष्टता से विभेद्य थे तथा भिन्न जातियों के संकरण से स्पष्ट संतति उत्पन्न करते थे। इस प्रकार मेंडल की सफलता के मुख्य हेतु थे – स्पष्ट लक्षणों का चयन, समुचित मापदंडों का प्रयोग एवं मटर जैसे उपयुक्त पौधे का चयन। इस प्रकार मेंडल की सफलता के प्रमुख हेतु इनकी कारणों का प्रभाव रहा था।
प्र.2. एकल- संकरण और द्वि – संकरण के ‘जीनोटाइप’ और ‘फीनोटाइप’ (Monohybrid and Dihybrid) के अनुपात क्या हैं?
Ans.
Phenotype | Genotype |
---|---|
Monohybrid | 3 : 1 |
Dihybrid | 9 : 3 : 3 : 1 |
प्र.3. लामार्कवाद (Lamarckism) के प्रमुख बिंदुओं को लिखिए।
Ans. लमार्क द्वारा जो जीव अपने अंगों का उपयोग करते हैं वह अधिक विकसित होता जाएगा, जबकि कम उपयोग या अनुपयोग रखने वाले अंग अविकसित (reduced) होते जाएँगे।
लामार्कवाद के प्रमुख बिंदु निम्न हैं –
- अनुकूल लक्षणों की वंशागति।
- अंगों के कम या अधिक प्रयोग का प्रभाव।
- वातावरण का सीधा प्रभाव।
- प्रकृति का सीधा प्रभाव।
प्र.4. कार्बनिक विकास (organic evolution) के दो प्रमाण (evidences) का उल्लेख करो।
Ans. जैव विकास को समझाने को समझाने का प्रमुख प्रमाण ‘समजात अंग एवं समरूप अंग’ द्वारा प्रस्तुत किया जा सकता है।
(i) समजात अंग (Homologous organ): ऐसी संरचनाएं जो उत्पत्ति तथा मूल रचना में समान परंतु कार्य के अनुसार उनकी बाह्य संरचना में परिवर्तन हो जाता है। जैसे – सील के फ्लिपर, पक्षी के पंख, घोड़े की अगली टांग तथा मनुष्य के हाथ की उत्पत्ति एक ही प्रकार की मानी जाती है।
(ii) समरूप अंग (Analogous organ): ऐसे अंग जो एक जैसे कार्य करते हैं परंतु मूल रचना में भिन्न होते हैं। जैसे – टेरोडैक्टाइल, पक्षी तथा चमगादड़ के पंख उड़ने का कार्य करते हैं परंतु इनकी उत्पत्ति अलग-अलग रूप में होती है।
प्र.5. D.N.A. तथा R.N.A. में अन्तर बताइए।
Ans. D.N.A. तथा R.N.A. में निम्नलिखित अन्तर है –
- D.N.A. मुख्यतः जीवों के क्रोमोसोम में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त यह कोशिकांगों में स्थायी रूप से उपस्थित होता है जबकि R.N.A. कोशिकांगों में क्षणिक रूप से पाया जाता है।
- D.N.A. का आकार द्वि-सर्पिल (Double Helix) होता है। यह द्वि श्रृंखला से युक्त होता है। इसमें एक शर्करा डिऑक्सी राइबोज और चार नाइट्रोजनस क्षारक – एडिनिन, थाइमिन, साइटोसिन, ग्वानिन पाए जाते हैं।
R.N.A. एक श्रृंखला वाला अणु होता है। इसमें शर्करा राइबोज होती है तथा क्षारक – एडिनिन, यूरेसिल, साइटोसिन, ग्वानिन पाए जाते हैं।
प्र.6. अलैंगिक तथा लैंगिक जनन में अन्तर लिखिए।
Ans. अलैंगिक जनन – हाइड्रा, यीस्ट, अमीबा, मोजीनिया, स्टारफिश आदि जीवों में अलैंगिक जनन होता है इस प्रकार जनन में एक ही जनक से नई संतति बनती है एवं समय की बचत होती है।
लैंगिक जनन – इस जनन क्रिया में नर तथा मादा जनन अंगों के मिलने तथा युग्मकों के संलयन द्वारा नयी संतति का निर्माण होता है।
जैसे नर एवं मादा जनन अंगों का एकसाथ रहना ही लैंगिक जनन कहलाता है।
अंतर यह है कि अलैंगिक जनन में नई संतति एक ही जनक द्वारा उत्पन्न होती है जबकि लैंगिक जनन में नर एवं मादा युग्मक के संलयन से नई संतति उत्पन्न होती है।
प्र.2. रोग क्या है? रोग के प्रकार के विषय में लिखिए।
Ans. जब शारीरिक अंगों की कार्यप्रणाली में कोई गड़बड़ी उत्पन्न हो जाती है, उसे रोग कहते हैं।
अधुनातन से मानव का स्वास्थ्य अच्छा रहे, यही रोग नहीं है। बिल्कुल स्वास्थ्य अवस्था को पूर्ण/अच्छे स्वास्थ्य कहते हैं। रोग के अधुनातन में साथ-साथ शारीरिक, मानसिक तथा आनुवंशिक समस्याएँ भी शामिल हैं। रोग के प्रमुख कारण हैं –
शारीरिक विकलांगता, शारीरिक अशक्तता, सामाजिक तथा मानसिक तनाव एवं चिंता।
इस प्रकार शारीरिक तथा मानसिक मानसिकता संतुलन के बिगड़ जाने को रोग का कारण व संतुलन बिगाड़ा जाना कहा जाता है।
इन्हीं कारणों में अनेकानेक क्रियाएं जिनकी कोई न कोई उपस्थिति रहती है, उसे –
(i) संक्रमण, (ii) उत्तम अवभ्र, (iii) संक्रमण चालन या संचरण कहा जाता है।
प्र.3. जब प्रजनन क्या है?
Ans. एक ही नस्ल के पशुओं के मध्य जब प्रजनन होता है, तो वह अंतः प्रजनन कहलाता है।
जब एक ही नस्ल के दो भिन्न प्रकार के पशुओं के मध्य प्रजनन होता है, तो वह बहिः प्रजनन कहलाता है।
अविकृत भ्रूणीय स्त्रोतों को प्राप्त करने हेतु अंतः प्रजनन आवश्यक है।
प्र.4. द्वैत्र निषेचन से आप क्या समझते हैं?
(What do you understand by Double Fertilization.)
Ans. द्वैत्र निषेचन प्रायः आवृतबीजी पौधों में पाया जाता है।
भ्रूणकोष (embryo sac) के अंदर पहुँचने के बाद पराग नलिका (pollen tube) से नरगामेट (male gametes) बाहर निकल आते हैं। इनमें से एक नरगामेट अंड कोशिका (egg cell) से संलयन (fusion) करता है और युग्मज (zygote) बनाता है जबकि दूसरा नरगामेट ध्रुवीय केन्द्रकों (polar nuclei) से संलयन (fusion) करता है और द्वितीयक भ्रूणीय केन्द्रक (secondary nucleus) बनाता है।
द्वितीयक केन्द्रक तथा नरगामेट के संलयन से बनी संरचना को प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक (primary endosperm) कहते हैं।
द्वैत्र निषेचन का महत्त्व :
- द्वैत्र निषेचन का आवृतबीजी पौधों में विशेष महत्त्व है। ऐसे पौधे में केवल संयुग्मन (syngamy) होता है और त्रिसंलयन (triple fusion) नहीं होगा तो भ्रूणपोष नहीं बनेगा और उसके फलस्वरूप जीवन क्रिया हेतु पूर्ण वाला बीज प्राप्त नहीं होगा।
- द्वैत्र निषेचन द्वारा भ्रूणपोष का निर्माण होता है। भ्रूणपोष वह ऊतक है जो अंकुरण हेतु पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करता है।
इसमें मातृ एवं पितृ गुणसूत्र (maternal and paternal chromosomes) पाए जाते हैं।
भ्रूणपोष कोषिकाओं में संकर शक्ति (hybrid vigour) के कारण शरीर क्रियात्मक आक्रामकता (physiological aggressiveness) दिखाई देती है।
2. आनुवंशिकता तथा विकास (Genetics & Evolution)
प्र.5. आरम्भ कूट (Initiation codon) तथा समाप्ति कूट (Termination codon) का वर्णन कीजिए
Ans. आरंभ कूट : आनुवंशिक प्रोटीन या पोलिपेप्टाइड के प्रथम एमिनो अम्ल नियतकर्ता को mRNA पर आरंभिक कूट कहते हैं। AUG तथा कभी-कभी GUG कूट आरंभ कूट कहलाते हैं तथा ये ट्रांसलेशन के दौरान आरंभ कूट के रूप में कार्य करते हैं।
समाप्ति कूट : यूएए (UAA), यूएजी (UAG) एवं यूजीए (UGA) ऐसे कूट हैं जो पोलिपेप्टाइड संश्लेषण को रोकते हैं तथा इन्हें समाप्ति कूट कहते हैं क्योंकि ये ट्रांसलेशन की प्रक्रिया को समाप्त कर देते हैं।
प्र.6. आनुवंशिक विचलन (Genetic drift) को परिभाषित करो। (2020)
Ans. आनुवंशिक विचलन (Genetic drift) निश्चित रूप से विभाजित जनसंख्या के छोटे से समूह के लिए होता है। जब एक छोटे समूह की आबादी अपने वंशजों का निर्माण करती है तब वह एक नई जनसंख्या बन जाती है। यह जनसंख्या अपने पूर्वज जनसंख्या से थोड़ी भिन्न होती है। आनुवंशिक विचलन में कुछ जीन प्रकार या तो पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं या पूरी तरह से किसी आबादी में स्थायीत्व प्राप्त कर लेते हैं।
प्र.7. मलेरिया के प्रेरक प्लास्मोडियम के जीवन चक्र में इंट्रोहॉस्ट की भूमिका स्पष्ट करो।
Ans. मलेरिया परजीवी प्लास्मोडियम का जीवन चक्र दोनार्य जीवों में पूर्ण होता है। जब मच्छर संक्रमित व्यक्ति को काटता है तो प्लास्मोडियम का स्पोरोजोइट मच्छर की लार ग्रंथियों से मानव शरीर में पहुँचता है।
मानव शरीर में स्पोरोजोइट लीवर की कोशिकाओं में प्रविष्ट होकर वृद्धि करता है तथा फिर लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करता है। यह द्विकोषिकीय एवं बहुकोषिकीय विखंडन द्वारा अपने जीवन चक्र को पूर्ण करता है। इस प्रकार मानव शरीर प्लास्मोडियम के जीवन चक्र में द्वितीयक होस्ट (intermediate host) के रूप में कार्य करता है।
प्र.7. निम्नलिखित को परिभाषित करें:
(a) सहलग्नता (Linkage)
(b) सहलग्नता वर्ग (Linkage group)
(c) प्रत्यक्ष सहलग्नता (Direct linkage)
(d) परोक्ष सहलग्नता (Indirect linkage)
Ans.
(a) सहलग्नता : एक ही क्रोमोसोम पर उपस्थित दो जीन अथवा जीनों की जोड़ी स्थानांतरित हुए बिना प्रायः एक साथ संतान में जाती है ऐसी प्रवृत्ति को सहलग्नता कहते हैं।
(b) सहलग्नता वर्ग : सभी सहलग्न जीन क्रोमोसोम पर उपस्थित होते हैं, इसलिए किसी एक क्रोमोसोम में उपस्थित सभी जीनों के विभाजन समूह को सहलग्न वर्ग कहते हैं।
(c) प्रत्यक्ष सहलग्नता : यदि गुणसूत्र की संख्या 10 हो (n = 10), मतल 7 लिंकज समूह (n = 7) पाई जाती है, तो उनमें प्रत्यक्ष सहलग्नता होती है।
(d) परोक्ष सहलग्नता : जो 50 से अधिक मैप यूनिट्स पर पाये जाते हैं उनमें परोक्ष सहलग्नता होती है।
प्र.8. युकैरोयोट्स एवं हेटैरोक्रोमेटिन में अंतर बताइए।
Ans. एक प्रमुख केंद्र में कुछ जीनों पर प्रोटीन बनने वाले होते हैं जिन्हें ‘युकैरोयोट’ कहते हैं और उसमें जो अच्छी तरह से बंधे होते हैं व घन होते हैं वे हेटैरोक्रोमेटिन कहलाते हैं।
यह रहा आपकी भेजी गई इमेज का पूरा टेक्स्ट, शब्दशः:
प्र.9. जीन संग्रह (Gene library) व जीन पूल (Gene pool) में क्या अंतर है?
Ans. Gene Pool : आनुवंशिक विविधता, अनुकूलन, समानता एवं पर्यावरणीय दृष्टि से जो जीन का समूह किसी प्रजाति विशेष में संरक्षित किया जाता है उसे Gene Pool कहते हैं।
Gene Library or Germplasm Bank : किसी जीवधारी के जीनों का संपूर्ण संग्रह जिसमें सभी प्रकार के जीनों को सुरक्षित रखा जाता है उसे जीन पुस्तकालय (Gene Library) या जर्मप्लाज्म बैंक कहा जाता है।
प्र.10. आधुनिक सिद्धांत के अनुसार कार्बनिक विकास (organic evolution) के उत्पत्तिक स्रोतों को सूचीबद्ध करो।
Ans. आनुवंशिकता एवं विकास के सिद्धांतों को आधुनिक सिद्धांत के रूप में जाना जाता है।
कार्बनिक विकास के मुख्य स्रोत निम्न हैं :
(i) उत्परिवर्तन (Mutation),
(ii) जीन पुनर्संयोजन (Gene recombination),
(iii) जीन विचलन (Genetic drift),
(iv) जीन स्थानांतरण (Gene transfer)
(v) प्राकृतिक चयन (Natural Selection)
प्र.11. पुस्क्रीकरण (Masculization) क्या है? यह कैसे होता है?
Ans. नर स्तनधारी Mammals के Zygote में उपस्थित Genetic Hormone आधारित द्विलिंगी ग्रंथियाँ कुछ विशेष लक्षणों का परिष्करण करती हैं। पुस्क्रीकरण (Masculization) शब्द का तात्पर्य किसी मादा में जंतु परिवर्तन के कारण होता है।
प्र.12. संपर्क संदम (Contact Inhibition) को समझाइए।
Ans. संपर्क संदम एक क्रिया है जिसमें जब एक कोशिका समूह वृद्धि करता है और बढ़ते-बढ़ते दूसरे के संपर्क में आती है तो उसकी वृद्धि निष्क्रिय हो जाती है।
अर्थात् जब दो कोशिकाएँ एक-दूसरे को स्पर्श करती हैं तब उनका विभाजन रुक जाता है।
इसे Contact inhibition से Cell division की गति रुक जाती है या दिशा बदल जाती है।
प्र.13. आर एच तत्व (Rh-Factor) के बारे में संक्षेप में लिखिए।
Ans. Rh-factor : 1940 में Landsteiner तथा Weiner नामक वैज्ञानिकों ने Macaca rhesus बंदर में (Rh-factor) का पता लगाया। यह एक Antigen है जो RBCs की सतह पर उपस्थित होता है। इस बंदर monkey के प्रयोग में अक्सर Rh से संबंधित तत्व पर परीक्षण किया गया था। यह Antigen (Rh) पाया जाता है। जिस मनुष्य में यह Antigen (Rh) पाया जाता है, उसे Rh⁺ तथा जिसमें नहीं पाया जाता है, उसे Rh⁻ कहते हैं।
जब Rh⁺ तथा Rh⁻ मनुष्य के blood को मिलाया जाता है तो ये आपस में अभिक्रिया करते हैं, जिससे मृत्यु का कारण बन जाता है।
प्र.14. मॉल्ट (Malt) उत्तक का वर्णन करो।
Ans. शरीर में पाए जाने वाले लिम्फैटिक उत्तक का 50% भाग श्लेष्मा से सम्बद्ध लिम्फैटिक उत्तक होता है। इसे अंग संबंधित लिम्फैटिक उत्तक कहा जाता है।
यह अंग जैसे टॉन्सिल्स, पेयर्स पैच इत्यादि में पाया जाता है। यह रोग प्रतिरोधक तंत्र को सक्रिय करता है।
स्वस्थ शरीर में MALT उत्तक I एवं B लिंफोसाइट्स उत्पन्न करते हैं जो प्रतिरक्षा के लिए शरीर में प्रवेश करते हैं।
यदि संक्रमण हो तो उस प्रवेश के स्थान पर द्वितीयक लिम्फिक ऊतक प्रतिक्रिया स्वरूप कार्य करता है।
यह रहा आपकी भेजी गई इमेज का टाइप किया गया कंटेंट (पेज – जैव प्रौद्योगिकी):
Q.15. ट्रांसजेनिक पशुओं (Transgenic animals) के लाभकारी प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर:
वे पशु जिनमें अन्य जीवों के जीन को स्थानांतरित किया गया हो, उन्हें ट्रांसजेनिक पशु कहते हैं।
ट्रांसजेनिक पशुओं के लाभ:
- औषधियों का उत्पादन करने में सहायक।
- रोगों के अध्ययन में प्रयोग (मानव रोगों की प्रक्रिया समझने हेतु)।
- जैविक उत्पादनों की वृद्धि।
- हानिकारक जीनों को निष्क्रिय करने हेतु।
- विषाक्तता परीक्षण।
- अंग प्रत्यारोपण हेतु प्रयोग।
Q.16. एक डीएनए प्रोब (DNA probe) क्या है? इसके उपयोगों की चर्चा करें। (2017)
उत्तर:
DNA प्रोब एक एकल-सूत्रीय DNA खंड होता है जो किसी विशेष जीन अनुक्रम से पूरक होता है।
यह रेडियोधर्मी या फ्लोरोसेंट लेबल वाला होता है ताकि इसे ट्रैक किया जा सके।
उपयोग:
- किसी विशिष्ट DNA अनुक्रम की पहचान करने हेतु।
- रोगजनक जीन की पहचान में।
- आनुवंशिक विकारों के परीक्षण में।
- अपराधियों की पहचान में।
- डीएनए फिंगरप्रिंटिंग में।
Q.16. एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेशियंस एक प्राकृतिक संवाहक है? कैसे? (2014)
Or
एग्रोबैक्टीरियम पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें। (2020)
उत्तर:
एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेशियंस एक रोगजनक जीवाणु है जो डाइकोट पौधों की जड़ों में ट्यूमर (tumor) उत्पन्न करता है।
इसके पास Ti प्लाज्मिड नामक DNA होता है, जो जड़ की कोशिकाओं में स्थानांतरित होकर ट्यूमर बनाता है।
- Ti प्लाज्मिड में T-DNA उपस्थित होता है।
- यह T-DNA पौधों की कोशिकाओं में हार्मोनल असंतुलन उत्पन्न करता है।
- इसका उपयोग वैज्ञानिकों द्वारा जीन स्थानांतरण के लिए एक प्राकृतिक संवाहक (natural vector) के रूप में किया जाता है।